Sunday, December 30, 2012

A tribute to the brave lady Nirbhaya...!!!


मन बहुत छिन्न हे,
यादें बिखर रही हैं,
कुछ दूर हे, कुछ पास हे,
मन में ये कैसा उबार हे,
चले जा रहे हैं राहों पर,
मंजिल से अनजान हैं,
उम्मीद..कि एक दिन छुएंगे आस्मां,
काँटों को पिए जा रहे हैं !!!

-नवीन गांगिल (३० दिसम्बर २०१२)